Best Sad Shayari’s In Hindi

Today we bring for you the desi shayari’s written only in Hindi so that you can enjoy its pure taste.

 

aur ke liye jite the
toh kisi ko
shikayat nahi thi
thoda sa apne liye
kya socha samja
jamana dushman ban gaya
thoda waqt jugar jane de tere apne faisle tujhe rulaige
bachpan ke khilaune sa kahi chupa lu tumhe aasu bahau, paw patku aur pa lu tumhe
khamoshi par mat jao sahab
rakh ke niche aksar
aag dabi hoti hai
bahot andar tak jala deti hai
voh shikayat jo baya nahi hoti
aao milkar gala ghote
mai mohabbat pakad kar laya hu
kaha jakhm khol baitha pagle yah namak ka sheher hai
bahut khas hote hai
voh log jo
aapki aavaj se aapki
khushi aur dukh ka
andaaj laga lete hai
mujhe khamosh dekh kar itna hiran kyu hote ho dost ?? kuch nahi hua bas bharosa karke dhoka khaya hai
jaruri nahi ki mohabbat mai roj bate ho
khamoshi se ek dusre ki dp dekhna bhi ishq hai
itni badsuluki na kare a jindagi
hum kaun sa yaha
baar baar aane vale hai
chote the toh sab
naam se bulate the
bade hue toh bas
kaam se bulate hai
rukh mandir ka kiya tha
usse bhulane ki niyat se
dua mai hath kya uthai
phir ussi ko mang baithe

 

 

 

उड़ता हुआ गुबार सर-ए-राह देख कर,
अंजाम हमने इश्क़ का सोचा तो रो दिए,
बादल फिजा में आप की तस्वीर बन गए,
साया कोई ख्याल से गुजरा तो रो दिए।

तुम बस उलझे रह गए हमें आजमाने में,
और हम हद से गुजर गए तुम्हें चाहने में।

चाहत की राह में बिखरे अरमान बहुत हैं,
हम उसकी याद में परेशान बहुत हैं,
वो हर बार दिल तोड़ता है ये कह कर,
मेरी उम्मीदों के अभी मुकाम बहुत हैं।

दिल पे बोझ लेकर तू मुलाकात को न आ,
मिलना है इस तरह तो बिछड़ना कबूल है।

हमसे पूछो किसीको खोने का ग़म क्या होता है,
हँसते हँसते रोने का दर्द क्या होता है,
खुदा उसी से क्यों मिला देता है हमें,
जिसका साथ किस्मत में नहीं होता है।

ज़िंदा रहे तो क्या है जो मर जाएं हम तो क्या,
दुनिया से खामोशी से गुजर जाएं हम तो क्या,
हस्ती ही अपनी क्या है इस ज़माने के सामने,
एक ख्वाब हैं जहान में बिखर जायें हम तो क्या।

लोग तो अपना बना कर छोड़ देते हैं,
कितनी आसानी से गैरों से रिश्ता जोड़ लेते हैं,
हम एक फूल तक ना तोड़ सके कभी,
कुछ लोग बेरहमी से दिल तोड़ देते हैं।

मिले न फूल तो काँटों से जख्म खाना है,
उसी गली में मुझे बार-बार जाना है,
मैं अपने खून का इल्जाम दूँ तो किसको दूँ,
लिहाज ये है कि क़ातिल से दोस्ताना है।

दिल पे बोझ लेकर तू मुलाकात को न आ,
मिलना है इस तरह तो बिछड़ना कबूल है।

रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हमने,
कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने,
हमें मालूम है क्या चीज़ है मोहब्बत यारो,
घर अपना जला कर किये हैं उजाले हमने।

फिर तेरा चर्चा हुआ, आँखें हमारी नम हुई,
धड़कनें फिर बढ़ गई, साँस फिर बेदम हुई,
चाँदनी की रात थी, तारों का पहरा भी था,
इसीलिये शायद गम की आतिशबाजी कम हुई।

 

 

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